सन 1919 का वह समय जब भारत गुलामी की जंजीर में जकड़ा हुआ था ।।।।
चारों तरफ हाहाकार मचा था ।।।
अंग्रेजी सरकार हुकूमत के नाम पर मौत का तांडव खेल रही थी ।।।
उसी समय जब जालियावाला बाग में हजारों निर्दोषों पर अंग्रेजी हुकूमत कहर बनकर बरसा और पल भर में ही निर्दोष भारतीयों की जान ले ली ।।।
यही वह समय था जब पंजाब के खेतों में एक 12 साल का बालक मिट्टी के साथ खेला करता था।।।
और यही वह घटना थी जिसने उसके हाथों में मिट्टी हटाकर बंदूक थमा दी ।।।
अपने निर्मम साथियों की हत्या का बदला लेने का प्रतिशोध भगत सिंह के मन में ज्वाला बनकर फुट रहा था।।
इसी ज्वाला का प्रतिशोध उन्होंने उस अंग्रेज अधिकारी को मौत की नींद सुला कर पूरा किया।।।
अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया साथ ही उनके साथियों को भी जेल में बंद कर दिया।।।।
अंग्रेजी सरकार भगत सिंह की ताकत को जानती थी।।।
वह डरती थी कहीं जनता के बीच इस बात का पता न चल जाए की भगत सिंह को फांसी दी जानी है ।।।
उन दिनों भगत सिंह भारतीयों के बीच एक युवा और निडर नेता के निर्णायक नेतृत्व बनकर उभरे थे।।। । अंग्रेजी सरकार को भरत सिंह से इतना ज्यादा डर लगता था कि उनका कोई भी अधिकारी भगत सिंह के साथ फांसी देने को तैयार नहीं था।।।।
हालात यह थे कि फांसी में मात्र 2 दिन बचे थे लेकिन अभी तक यह तय नहीं हुआ था कि आखिर कौन भगत सिंह के साथ जाएगा। ।।।
अंग्रेजी हुकूमत का कोई भी अधिकारी इतना बड़ा रिस्क आपने पर नहीं लेना चाहता था।।।
बहुत जोर डालने पर यह तय हुआ कि भगत सिंह और उसके साथियों को 24 नहीं बल्कि 23 मार्च को भी फांसी दे दी जाए ।।।।
अंग्रेजों के डर का ही परिणाम था कि अंग्रेजी सरकार अपने वादे के मुताबिक भगत सिंह को एक दिन पहले ही फांसी दे दी ।।।।
तमाम सरकारी पंडित यह जानते थे कि अगर भगत सिंह को तय तारीख पर फांसी दी गई तो जनता उस दिन विरोध करेगी ।।।।
और सरकार किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती थी ।।।।
यही कारण था अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह और उसके साथियों को तह समय से एक दिन पहले फांसी दे दी।।।।
इस बात का आक्रोश आज भी भारतीयों में है ।।।
जय हिंद वंदे मातरम
चारों तरफ हाहाकार मचा था ।।।
अंग्रेजी सरकार हुकूमत के नाम पर मौत का तांडव खेल रही थी ।।।
उसी समय जब जालियावाला बाग में हजारों निर्दोषों पर अंग्रेजी हुकूमत कहर बनकर बरसा और पल भर में ही निर्दोष भारतीयों की जान ले ली ।।।
यही वह समय था जब पंजाब के खेतों में एक 12 साल का बालक मिट्टी के साथ खेला करता था।।।
और यही वह घटना थी जिसने उसके हाथों में मिट्टी हटाकर बंदूक थमा दी ।।।
अपने निर्मम साथियों की हत्या का बदला लेने का प्रतिशोध भगत सिंह के मन में ज्वाला बनकर फुट रहा था।।
इसी ज्वाला का प्रतिशोध उन्होंने उस अंग्रेज अधिकारी को मौत की नींद सुला कर पूरा किया।।।
अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया साथ ही उनके साथियों को भी जेल में बंद कर दिया।।।।
अंग्रेजी सरकार भगत सिंह की ताकत को जानती थी।।।
वह डरती थी कहीं जनता के बीच इस बात का पता न चल जाए की भगत सिंह को फांसी दी जानी है ।।।
उन दिनों भगत सिंह भारतीयों के बीच एक युवा और निडर नेता के निर्णायक नेतृत्व बनकर उभरे थे।।। । अंग्रेजी सरकार को भरत सिंह से इतना ज्यादा डर लगता था कि उनका कोई भी अधिकारी भगत सिंह के साथ फांसी देने को तैयार नहीं था।।।।
हालात यह थे कि फांसी में मात्र 2 दिन बचे थे लेकिन अभी तक यह तय नहीं हुआ था कि आखिर कौन भगत सिंह के साथ जाएगा। ।।।
अंग्रेजी हुकूमत का कोई भी अधिकारी इतना बड़ा रिस्क आपने पर नहीं लेना चाहता था।।।
बहुत जोर डालने पर यह तय हुआ कि भगत सिंह और उसके साथियों को 24 नहीं बल्कि 23 मार्च को भी फांसी दे दी जाए ।।।।
अंग्रेजों के डर का ही परिणाम था कि अंग्रेजी सरकार अपने वादे के मुताबिक भगत सिंह को एक दिन पहले ही फांसी दे दी ।।।।
तमाम सरकारी पंडित यह जानते थे कि अगर भगत सिंह को तय तारीख पर फांसी दी गई तो जनता उस दिन विरोध करेगी ।।।।
और सरकार किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती थी ।।।।
यही कारण था अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह और उसके साथियों को तह समय से एक दिन पहले फांसी दे दी।।।।
इस बात का आक्रोश आज भी भारतीयों में है ।।।
जय हिंद वंदे मातरम
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